Saturday, August 28, 2021

डॉ वर्षा सिंह जन्म जयंती आयोजन - 2021



प्रिय ब्लॉग साथियों, 
मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर महिला काव्य मंच सागर इकाई द्वारा "डॉ वर्षा सिंह जन्म जयंती आयोजन" रखा गया। आयोजन में श्यामलम संस्था के अध्यक्ष श्री उमाकांत मिश्र, शायर अशोक मिजाज़, कवि वीरेन्द्र  प्रधान, लेखक राजकुमार तिवारी, समाज सेवी भाई कपिल स्वामी एवं भाई डॉ विनोद तिवारी, लोकगीत गायक शिवरतन यादव, डॉ. चंचला दवे, श्रीमती सुनीला सराफ, डॉ. अंजना चतुर्वेदी, देवकी नाईक दीपा, भाई पुष्पेन्द्र दुबे आदि बड़ी संख्या में विद्वतजन ने वर्षा दीदी के प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
शिवरतन यादव जी ने वर्षा दीदी की ग़ज़ल का गायन किया। मुख्य वक्ता के रूप में मैंने दीदी के संस्मरण साझा किए। आयोजन की अध्यक्ष डॉ. चंचला दवे, मुख्य अतिथि श्रीमती सुनीला सराफ, संचालक डॉ अंजना चतुर्वेदी ने वर्षा दीदी का भावभीना स्मरण किया। भाई पुष्पेन्द्र दुबे ने वर्षा दीदी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपनी कविता प्रस्तुत की। श्री उमाकांत मिश्र, शायर अशोक मिजाज़, कवि वीरेन्द्र  प्रधान, लेखक राजकुमार तिवारी, समाज सेवी कपिल स्वामी ने अपने भावसुमन अर्पित किए।
      इस अवसर पर प्रतिष्ठित चित्रकार श्री असरार अहमद द्वारा बनाया गया वर्षा दीदी का पोट्रेट मुझे भेंट किया गया। यह आयोजन आदर्श संगीत महाविद्यालय के सभाकक्ष में आयोजित किया गया था। (28.08.2021)
🙏हार्दिक धन्यवाद महिला काव्य मंच सागर इकाई 🙏

Tuesday, July 13, 2021

आज मुक्त हुआ सागर रेलवे स्टेशन अंग्रेजों की गुलामी से - डॉ. सुश्री शरद सिंह

🎉एक ख़ुशख़बरी... एक जीत...🎉
मित्रो, अंततः सागर रेलवे स्टेशन के नाम की स्पेलिंग SAUGOR के बदले SAGAR कर दी गई। मैंने 26 दिसम्बर 2018 अपने "चर्चा प्लस" कॉलम। में "सागर दिनकर" में इस संबंध में पहली बार लिखित आवाज उठाई थी। इसके बाद  अनेक मंचों एवं लेखों के माध्यम से मैंने यह मांग ज़ारी रखी। भाई रघु ठाकुर ने भी इस संबंध में पत्राचार किया था। अंततः सभी के समर्थन एवं राजनीतिक पहलक़दमी से अब वह मांग पूरी हुई। हुर्रे !! 🙋🎉🙋🎉🙋🎉🙋
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आज मुक्त हुआ सागर रेलवे स्टेशन अंग्रेजों की गुलामी से - डॉ. सुश्री शरद सिंह

अंग्रेजों के जमाने से सागर जिले के नाम की स्पेलिंग को लेकर अब तक चल रहा भ्रम दूर करने के लिए जिला योजना समिति की बैठक में सहमति बन गई है। बैठक में सागर रेलवे स्टेशन का नाम अब सागौर के नाम से सागर करने पर प्रभारी मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने सहमति दी है। इसके बाद यह प्रस्ताव भोपाल मंत्रालय भेजा जाएगा और यहां अन्य कागजी कार्रवाई होने के बाद नाम बदलने का निर्णय लिया जाएगा। जिसके बाद अब सागर जिले में आने लोगों को ट्रेन सर्च करने और टिकिट लेने में काफी राहत मिलने जा रही है। 
उल्लेखनीय है कि  "सागर दिनकर" में प्रकाशित होने वाले अपने बहुचर्चित कॉलम "चर्चा प्लस" में 26 सितम्बर 2018 को सागर रेलवेस्टेशन के नाम की स्पेलिंग सुधारे जाने की पहली बार ज़ोरदार आवाज़ उठाई थी। आज सागर रेलवेस्टेशन के नाम बदलने को ले कर डॉ (सुश्री) शरद सिंह का कहना है कि "जनहित में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय हुआ है। पहली बार 2018 में मैंने सागर दिनकर के अपने कॉलम में इस बारे में आवाज़ उठाई थी। इसके बाद  अनेक मंचों एवं लेखों के माध्यम से मैंने यह मांग ज़ारी रखी। भाई रघु ठाकुर ने भी इस संबंध में पत्राचार किया था। अंततः सभी के समर्थन एवं राजनीतिक पहलक़दमी से अब वह मांग पूरी हुई। आज मुझे महसूस हो रहा है कि सागर रेलवेस्टेशन आज अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो गया है और उसे अपना सही नाम मिल गया है। "
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Sunday, February 21, 2021

तुम कितनी ख़ूबसूरत हो | नाटक | मंचन | डॉ शरद सिंह

21.02. 21 को मैंने (डॉ शरद सिंह ने) कथाकार यशपाल की कहानी पर आधारित नाटक "तुम कितनी ख़ूबसूरत हो" का आनंद लिया। इसे स्थानीय रवीन्द्र भवन प्रेक्षागृह में प्रस्तुत किया था अन्वेषण थिएटर ग्रुप ने।  निर्देशन किया था अथग के वरिष्ठ नाट्य निर्देशक जगदीश शर्मा ने । इसमें वरिष्ठ रंगकर्मी रविंद्र दुबे कक्का, कपिल नाहर, करिश्मा गुप्ता आदि कलाकारों ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों को बांधे रखा। नाटक की वीडियो और फोटोज़ भी मैंने खींचे और इस नाट्य मंचन की  दीदी डॉ वर्षा सिंह द्वारा की गई समीक्षा आज "आचरण" में प्रकाशित हुई है। यह सब आपसे साझा कर रही हूं 🌹🙏🌹

Saturday, February 20, 2021

सारस्वतम् व्याख्यानमाला में डॉ शरद सिंह

 

Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala

मैं डॉ शरद सिंह और दीदी डॉ वर्षा सिंह ... आयोजन...18 फरवरी 2021, कालिदास अकादमी, उज्जैन द्वारा " संस्कृत विभाग, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (केन्द्रीय), सागर में सारस्वतम् व्याख्यानमाला ( ऑफ लाइन ) के अंतर्गत आयोजित "परंपरा एवं आधुनिकता का द्वन्द्व - संस्कृत के मंच पर " विषय पर राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति, हिन्दी एवं संस्कृत के वरिष्ठ विद्वान् प्रो राधावल्लभ त्रिपाठी का व्याख्यान। अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो जनकदुलारी आही ने की। विशिष्ट अतिथि थे संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रकाश त्रिपाठी । आयोजन स्थल था - विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग का सभागार।

Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala

Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala

Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala
Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala

Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala

Dr (Miss) Sharad Singh in Saraswatam Vyakhyanmala

पुस्तक संवाद में डॉ शरद सिंह

 

Dr ( Miss) Sharad Singh

कोरोना के आतंक के लगभग 11 माह बाद कोरोना उत्तरवर्ती समय में इस सप्ताह  वसंत में दिनांक 17 फरवरी 2021 को मैं ( डॉ शरद सिंह) किसी ग़ैर ऑनलाइन साहित्यिक आयोजन में शामिल हुई। यह आयोजन था - स्थानीय साहित्यिक संस्था श्यामलम् और पत्रकारिता विद्यालय इंक मीडिया, सागर के संयोजन में शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर के सभागार में आयोजित "खेल पत्रकारिता के आयाम" पुस्तक पर संवाद कार्यक्रम। पुस्तक के लेखक इंक मीडिया, सागर के ही संचालक डॉ. आशीष द्विवेदी हैं। इस आयोजन में नगर के गणमान्य नागरिकों सहित सागर निवासी NDTV के वरिष्ठ पत्रकार सूर्यकांत पाठक भी उपस्थित रहे। संचालन किया था डॉ अमर जैन ने।



Dr (Miss) Sharad Singh in Pustak Samwad at PT. Dindayal Upadyay Govt. Art and Commerce College

Dr (Miss) Sharad Singh in Pastak Samwad at PT. Dindayal Upadyay Govt. Art and Commerce College

Dr (Miss) Sharad Singh in Pastak Samwad at PT. Dindayal Upadyay Govt. Art and Commerce College


Dr (Miss) Sharad Singh in Pastak Samwad at PT. Dindayal Upadyay Govt. Art and Commerce College


Dr (Miss) Sharad Singh in Pastak Samwad at PT. Dindayal Upadyay Govt. Art and Commerce College


Dr (Miss) Sharad Singh in Pastak Samwad at PT. Dindayal Upadyay Govt. Art and Commerce College


Monday, August 10, 2020

शहीद प्रदीप लारिया



शहीद प्रदीप लारिया

वतन पे मरने वालों से वतन की लाज रहती है
वतन पे मरने वालों की कहानी दुनिया कहती है
- डॉ शरद सिंह

11 अगस्त 2020 ... आज स्मरण कर रही हूं सागर शहर के शहीद प्रदीप लारिया का जो नक्सलियों के हाथों मारे गए थे और उस समय उनकी आयु मात्र 23 वर्ष थी। सागर शहर को उन पर गर्व है।
"मां जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ में होती है। मेरे लिए देश सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इसमें भले ही मेरे प्राण क्यों न चले जाएं...।" प्रदीप लारिया ने अपनी मां से कहा था।
 11 अगस्त 2002 को जब प्रदीप अपने साथियों के साथ उड़ीसा के गोदाल पादर जिले के गुनुपुर गांव के पास गश्त कर रहे थे, तभी वहां नक्सलियों ने उनके वाहन को सुरंग में ब्लास्ट कर उड़ा दिया था। धमाके में वाहन समेत प्रदीप करीब 25 फीट दूर फिका गए थे। ज़मीन पर गिरते ही अपने साथियों से उनके पहले शब्द थे कि "दुश्मनों को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं है, चाहे कुछ भी हो जाए।"  बस इतना कहते ही उनकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो गई। उनके पार्थिव शरीर को स्वतंत्रता दिवस के दिन सागर लाया गया था और पूरे सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन किया गया था। 
        14 जून 1979 को जन्मे प्रदीप लारिया की बाल्यावस्था में ही सिर से पिता का साया उठ गया था। घर की आर्थिक स्थिति कमज़ोर थी। लेकिन एनसीसी में अच्छे प्रदर्शन के कारण सीआरपीएफ में आसानी से चयन हो गया। इस बीच उनका विवाह भी हो गया। मात्र एक साल नौकरी करने के बाद नक्सली हमले में शहीद हो गए। सागर के लाजपतपुरा वार्ड निवासी प्रदीप लारिया  बेहतरीन क्रिकेटर भी थे। उनके मोहल्ले के सभी लोग उन्हें जडेजा कहकर बुलाते थे। आज सभी उनका स्मरण कर गर्व से भर उठते हैं।
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